युगांतरकारी समय है यह, अपनी भूमिकाएं चुन लें
किसी भी राष्ट्र के जीवन में सम्पूर्ण राष्ट्र के एक साथ आंदोलित होकर उठ खड़े होने के अवसर रोज-रोज नहीं आते। सन् 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर अंगरेजी शासकों के विरुद्ध सम्पूर्ण राष्ट्र के उठ खड़े होने के लगभग सात दशक बाद आज यह देश अन्ना हजारे के आह्वान पर देश को भ्रष्टाचार-मुक्त करके व्यवस्था परिवर्तन के लिए उठ खड़ा हुआ है। यह युगांतरकारी समय है। जो इसे नहीं पहचान पा रहे हों ..पहचान लें, नहीं देख पा रहे हों.. देख लें, नहीं समझ पा रहे हों.. समझ लें और अपनी-अपनी भूमिकाएं चुन लें।
राष्ट्रीय जीवन में व्यापक परिवर्तन के लिए प्रारंभ हुए संग्राम में भागीदारी का ऐसा अवसर किसी व्यक्ति के कार्यक्षम जीवनकाल में दोबारा आने के बारे में कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
लोकतांत्रिक प्रणाली में सड़ांध भरने वाली व्यवस्थाओं को उखाड़ फेंकने और लोकमत के निर्देशन में सबलता से आगे बढ़ने वाली भ्रष्टाचार-मुक्त लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना के इस राष्ट्रीय प्रयास से मुंह चुराने वाले अपने इस कृत्य के लिए आने वाली पीढ़ियों के समक्ष लज्जित होने के सिवा कोई रास्ता न पा सकेंगे।
आइए, अपने भारत राष्ट्र को जन-जन के लिए, उसके प्रत्येक नागरिक के लिए, वास्तव में समतापरक, बेहतर और लोकतांत्रिक अधिकारों से सम्पन्न बनाने के लिए महात्मा अन्ना हजारे के नेतृत्व में प्रारंभ हुए संघर्ष का हिस्सा बन कर अपने कालखंड को कलंकित होने से बचाने में योगदान कीजिए। जय हिंद.. जय भारत।
